खैर छोड़ो ये सब

सुनो! कभी -कभी  सोचता हूँ कुछ समय में  तुम किसी और की हो जाओगी, तो सब कैसे पलट जाएगा न ।
बेदर्द वक़्त ने हमें दूर करने का फरमान जो जारी कर दिया था।
पता नहीं यार , तेरे लिए खुश होऊँ, या अपने लिए दुखी।
तुझसे बात करना तो चाहता हूँ, पर फोन उठते ही वो तेरी सिसकियाँ अब मुझे सहा नहीं जाएगा ।
कभी -कभी रात भर जागना, और फोन पर बस एक दूसरे की ख़ामोशीयाँ सुनना।
मुझे अच्छा लगता था। तेरे लिए खुद को भूल जाना मुझे अच्छा लगता था।
तेरी दुष्टता, मेरी आदतें बन गई थी । तेरी फिक्र में मैं पागल सा हो गया था।
पर मुझे अच्छा लगता था,
अब तेरी तरह ये नींद भी, मुझसे रूठकर पराई सी होने लग गई।
तू चली गई ना इसलिए, अब शिकायत भी तो नहीं कर सकता।
हाँ ! बस तेरे लिए, हर रोज दुवाएं जरूर माँगता।

खैर छोड़ ना ये सब …..मैं भी क्या पागलों वाली बातें लेकर बैठ गया।

अच्छा सुन ना !
कभी कभी सोचता हूँ, कि, वक़्त को अपनी ज़िंदगी रिश्वत में देकर,  तुझे फिर से अपने नाम कर लूँ।
दुनिया की  सारी रस्में तोड़कर, तुझे फिर अपने पास  रख लूँ।
तुझे खोने का डर मुझे अब  पागल जो करने लगा।
 ऐसा नहीं कि, ये डर पहले कभी नहीं हुआ,
पर  तेरी कसमों की कतारों नें मुझे हर बार चुप कर दिया।
ये कहकर कि,
छोड़ ना, कल के चक्कर में हम अपना आज क्यों बर्बाद करें,
लो देखो ! आ तो गया कल! अब क्या कहोगी।  मुझे पता है तुम जवाब में बस आंसुओं की धार बहा दोगी।
मैं जानता हूँ, तकलीफ़ तुझे मुझसे ज्यादा है, पर क्या करूँ, मुझपे भी अब जिम्मेदारियों का वादा है।

खैर छोड़ ना ये सब …..मैं भी क्या पागलों वाली बातें लेकर बैठ गया।

अच्छा सुनों ! ये खयाल बार बार आता है।
कि,मेरे होते हुए तुम्हें कैसे, कोई और झेल सकता है?
मेरे होते हुए कैसे ,तुम्हें कोई और देख सकता है।
कैसे तुम भी उससे मेरे जितना, हक़ से झगड़ सकती हो?
कैसे तुम उसकी शर्ट की जेब में, दुनिया भर के प्रेम पत्र डाल सकती हो?
कैसे तुम उसके अच्छे खासे बालों को, चिड़िया का घोंसला बना सकती हो।
पर ये सच है कि,
तुम्हारे बिना अब ज़िन्दगी एक दम उमस वाली लगती है। जैसे हवा का चलना बंद हो गया हो ।
जैसे सावन को किसी ने कैद कर लिया हो।
बदन में कपकपाहट ऐसे हो रही है, मानो शरीर मुझसे  ही दूर होता जा रहा हो।

खैर छोड़ो ये सब , मैं भी क्या लेकर बैठ गया।

अच्छा सुनो!
ये मिलना विलना तो चलता रहेगा, जनम- वनम वाली थियोरी भी अब रास नहीं आती।
पर तुम्हारा होना खूबसूरत है, मेरा गुजरा कल खूबसूरत है। वो सड़के, वो गलियां खूबसूरत है, जिनके इर्द गिर्द हम दुनिया नापा करते थे।
वो चाउमीन की ठेली  खूबसूरत है, जहां हम कॉलेज के बाद, खड़े खड़े चाउमीन खाया करते थे।
वेसे तो तुम हर रूप में मेरे लिए किसी परी से कम नहीं थी।
पर तुम्हें मेरे लिए लाल जोड़े में, सजके देखना भी मेरी दिली तमन्ना थी।
एक ख्वाब जो इन बहुत से सालों में मैंने हमारे लिए देखा था।
लेकिन वक़्त को ये सब मुमकिन ना था।

खैर छोड़ो ये सब।

सुनों एक बात कहनी थी,
शुक्रिया!  मेरे लिए पैदा होने के लिये ,  मुझे अपनी आंखों से ख्वाब दिखाने के लिए शुक्रिया,
मेरा ख्वाब बन जाने के लिये शुक्रिया, अपना ख्वाब बनाने के लिए शुक्रिया।
दोस्ती और मोहब्बत के बीच के वक़्त को नशा बनाने के लिए शुक्रिया।
तुम्हारे जैसे लोग दुनिया मे बहुत कम है। कम नहीं हैं, साला हैं ही नहीं। तुम एकलौती पीस हो।
बवाल हो तुम,धड़कन अटक जाती हैं , जब कहीं तुम्हारी मुस्कान से ही हिलोरे उठ पड़ती हैं।
मैं जानता हूँ तुम्हें प्यार को एक्स्प्रेस करने का तरीक़ा नहीं आता,
पर कम्बखत कोई इस दिल से तो पूछे, कि, तुझ सा  इज़हार-ए-मोहहबत  पूरी दुनिया में नहीं।
इस रूह से लेकर जिस्म तक, तुझ सा कोई दूजा नहीं।

खैर छोड़ो ये सब।

सुनो, तुमको मोहब्बत मुबारक, तुम इस बार भी जीत गयी।
लेकिन ऐसा नहीं है,  मैं हर बार जानबूझ के तुमसे हार जाता हूँ।
मैं चाह के भी तुमसे जीत नहीं पाता, क्योंकि तेरी इन पागल हरकतों में खो जो जाता हूँ।
मोहब्बत जिंदाबाद, तुम जिंदाबाद, दोस्ती जिंदाबाद।

खैर छोड़ो ये सब

अच्छा सुनों! ये कुछ चंद लाइने तुम्हारे लिए। तुमसे खूबसूरत तो नहीं, पर दिल से निकले हैं यार।

“एक अनजाने रिश्ते की ख़ुशी और डर दोनों पनपने लगे हैं।
सवाल -जवाब की उलझनें आपस में ख़ुद से ही झगड़ने लगें हैं।
जाने क्या मोड़ लेंगी राहें, ना उसको पता है ना कोई ख़बर मुझे।
सही ग़लत के मायने, मुझे दिन रात टटोलने लगे हैं। “

उम्मीद करती हूँ आपको कविता पसंद आई होगी। आप मुझे अपनी राय और सुझाव कमेन्ट करके भी बता सकते हैं। 
हंसते, मुस्कुराते, स्वस्थ रहिये। ज़िन्दगी यही है। 

आप मुझसे इस आईडी पर संपर्क कर सकते हैं.
sujatadevrari198@gmail.com

© सुजाता देवराड़ी

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