तकनीकी & सोशल मीडिया से जुड़े कई पहलू (Digital Marketing, Social Media)

क्या तकनीकी का उपयोग पूरी तरह से हमारे हित में है ?


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ज हम लोग तकनीकी के उस दौर में हैं जहां हर चीज कंप्यूटर से जुड़ी हुई है । इसके इस्तेमाल से हमारी दिनचर्या बहुत आसान हो चुकी है। पहले जो बात किसी दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाने में हफ्ते दस दिन लग जाते थे, यहाँ तक कि महीने भी लग जाते थे। लेकिन आज के कंप्यूटरीकरण दौर ने मिनटों में सूचनाओं का आदान -प्रदान संभव कर दिया है। काम करने की रफ्तार दस गुनी  बढ़ गई है। पढ़ाई- लिखाई से लेकर, हमे खाने पीने यहाँ तक कि पहनने के कपड़े भी हम ऑनलाइन खरीद सकते हैं। हम दुनियाँ के किसी भी कोने में ही क्यों ना हो, तकनीकी ने हमारे लिए सब कुछ आसान कर दिया है। सब कुछ आज अनलाईन संभव हो चुका है। अगर मैं ये कहूँ कि, एक आम व्यक्ति को उसके सपनों की उड़ान भरने में तकनीकी ने अहम भूमिका निभाई है। तो गलत नहीं होगा। और कारण है कि, तकनीकी से जुड़े हर माध्यमों से हमारा एक गहरा रिश्ता बन चुका है। समाचार से लेकर मनोरंजन व्यवसाय से लेकर नौकरी सारी खबरों को तक, हम आसानी से इंटरनेट पर देख पढ़ सकते हैं। तकनीकी हमारे जीवन का एक अहम अंग बन चुकी है। इसी तकनीकी के कई माध्यम हैं।

और इसी तकनीकी का एक माध्यम है, सोशल मीडिया !  जिस पर आज हम इतना निर्भर हो चुके हैं कि, अपनी हर छोटी बड़ी बात को सोशल मीडिया पर साझा करना नहीं भूलते हैं। हमें हर तरह की  जानकारी इसी माध्यम के जरिए आसानी से प्राप्त हो जाती है। इससे हमें नए लोगों को जानने का मौक़ा तो मिलता ही है, साथ ही अपने व्यवसाय को लेकर उसका प्रचार- प्रसार करने का भी सोशल मीडिया एक सशक्त माध्यम बन चुका है। अपने हुनर को सोशल मीडिया के जरिए पूरी दुनिया तक पहुंचाना अब बहुत आसान हो चुका है। सोशल मीडिया एक मंच कि तरह हर रूप में हमारे लिए कारगर साबित हुआ है। यही नहीं, सोशल मीडिया के जरिए ही आज लोग आसानी से सरकार और कानून तक पहुँच जाते हैं। और अपनी बात को उन तक पहुंचाने में कामयाब है। अगर मैं अपनी बात करूँ तो मेरे लिए सोशल मीडिया एक रिपोटर की  तरह है, एक परिवार की तरह है, एक दोस्त की तरह है। जिसकी वजह से आज कई लोग शिक्षित हुए हैं। सूचना के प्रवाह विश्व स्तर पर क़ामयाबी हासिल की है। कई लोगों ने भेद भाव की सीमाओं को कम किया है। रिश्तों को एक नए नजरिए से देखने का प्रयत्न किया है। सोशल मीडिया एक ऐसा समूह और समुदाय बन गया है कि, सरकार और कानून को भी इससे डर लगने लगा है। कि, अगर कोई गलत फैसला जनता को नुकसान देगा तो। सोशल मीडिया आग की तरह फैलने लगता है। ये एक ऐसा समाज है जो, आपको एक नए निर्माण की ओर अग्रसर करता है। 

लेकिन बात फिर घूम फिर कर वहीं आती है। कि, एक सिक्के के दो पहलू होते हैं। जहां एक तरफ तकनीक ने हमारे  समय की बचत और हमारी बुद्धि का विकास किया है। वहीं दूसरी तरफ इसके कई नुकसान भी हमें देखने को मिलते हैं।  जहां एक तरफ सोशल मिडीया ने हमारे पुराने मित्रों को तो हमारे बहुत करीब कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ उसी सोशल मीडिया के जरिए कई कुपित लोगों ने हमारे निजी ज़िंदगी में  काफी हद तक दखलंदाजी भी कर दी है।  
जी हाँ ये सच है। सोशल मीडिया हमारे लिए एक सुविधा के साथ साथ -कई दुविधाओं का भी साधन बन चुका है। ये इसलिए नहीं हुआ कि, ये माध्यम गलत है। बल्कि इसलिए हुआ है कि, हमने खुद से भी ज्यादा आज इसको वरीयता दी है। हम लोग ये भूल गए कि, ये ज़िंदगी को जीने का एक जरिया है। ये हमारी ज़िंदगी नहीं है।और हमने अपनी ज़िंदगी की पूरी बागडोर इसके हाथों में थमा दी है।  हमारा पूरी तरह से इन माध्यमों पर निर्भर होना कहीं ना कहीं हमारे भविष्य को एक संदेह भरे भविष्य की तरफ भी लेकर जा रहा है। जितनी आज हर चीज आसान लग रही है, उतनी ही आसानी कहीं ना कहीं हमें खतरे कि तरफ भी खींच रही है। इसी वजह से आय दिन हमारे ज़ेहन में कई तरह के सवाल तब खड़े हो जाते हैं, जब सोशल मीडिया के जरिए कुछ एसी बातें सामने आती हैं, जिनकी शायद कभी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता है। और वो सवाल कुछ इस तरह है। 
  
  • कि क्या सोशल मीडिया हमारे लिए सही मायने में सुरक्षित है? और अगर नहीं तो आखिर क्यों? 
  • जो व्यक्ति हमारे साथ हमारे मित्र के रूप में सोशल मीडिया से जुड़े हैं । क्या उनमें सभी वाकई में हमारे मित्र हैं? अगर नहीं तो ऐसे लोगों से सावधान कैसे रहे ?
  • जो अकाउंट यानि खाता हमने सोशल मीडिया पर बनाया है? वो सुरक्षित है? अगर नहीं तो उसे कैसे सुरक्षित करें? 
  • क्या सोशल मीडिया के जरिए आतंक को हम तक पहुंचना आसान हो गया है ? 
  • क्या सोशल मीडिया ने हमारे निजी रिश्तों में दूरियों कि जगह बना दी  है? 
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इस तरह के कई सवाल हैं जो मुझे परेशान करते  हैं। और मुझे लगता है कि, कहीं ना कहीं आपके दिमाग में भी कभी ना कभी ये सवाल दस्तक जरूर देते होंगे। लेकिन मुझे आज इस लेख को लिखने का सही समय इसलिए भी लगा क्योंकि, एक घटना ने  मुझे परेशान कर दिया। वो घटना इसी सोशल मीडिया से जुड़ी है। जिसने एक परिवार को बड़ी चतुराई से धोखा देने की कोशिश की । मुझे लगता था कि, ये फकेबुक पर लोग कुछ भी अनाब -शनाब लिख देते हैं। झूट को सच बनाकर लोगों को परोसते हैं। मगर जब मेरे एक दोस्त के रिश्ते में किसी के साथ फकेबुक के जरिए एक हैरान कर देने वाली बात  सामने आई तो लगा कि, आज कल कुछ भी सुरक्षित नहीं हैं। कोई कहीं से भी हमारे मित्र बनकर हमें बड़ी चतुराई के साथ धोखा दे सकते है। और इसी बात ने मुझे ये लेख लिखने पर मजबूर कर दिया। 

पिछले एक हफ्ते पहले मेरे एक दोस्त महेश ने हमें बताया कि, उनके किसी रिश्ते में  फेसबुक के जरिए किसी ने उनके परिवार के किसी व्यक्ति के नाम पर अकाउंट बनाया और परिवार और एक दो जानने वालों को मित्रता निमंत्रण ( फ्रेंड रिक्वेस्ट) भेजी । फिर मेसेंजर के जरिए सभी परिवार वालों को पैसों के लिए मेसेज किया। और बाकायदा अपना अकाउंट नंबर भी भेजा । मेसेज  10.000 रूपयों की आवशयकता के लिए किया गया था। उनमें से महेश के रिश्तेदारों के एक परिवार को संदेह हुआ कि, जिस आईडी से उनको ये मेसेज आया था। वो तो सम्पन्न परिवार से थे। फिर फोन करने के बजाय उन्होंने मेसे क्यों किया? उन्होंने ये बात अपनी बेटी को बताई तो पता चला कि, बेटी को भी मेसेज हुआ है। फिर बाकी परिवार वालों से पूछताछ के बाद पता चला 
कि, जिनके नाम पर आईडी बनी थी। उन्होंने तो इस तरह का कोई मेसेज नहीं किया था। फिर किसी तरह  उस अकाउंट नंबर कि जांच कराई गई, जो मेसेंजर में भेज गया था। जांच से पता चला कि, वो अकाउंट किसी दूसरे शहर का है। और जिनके नाम पर मेसेज गया था वो तो देहरादून निवासी हैं। अगर उनमें से कोई भी परिवार कि मदद के नाम पर उस अकाउंट में पैसे भेज देता तो ? ये बात कहने को तो बड़ी आम लगती है। क्योंकि इस तरह कि घटना आय दिन किसी ना किसी तरह से हो ही जाती है। लेकिन मेरे लिए ये बात बहुत बड़ी है। क्योंकि अगर उस व्यक्ति ने 50 लोगों को भी वो मेसेज किया होता और अगर उनमें से 5 या 10 लोग भी पैसे भेज देते तो उस बंदे को तो आसानी से पैसे मिल जाते । लेकिन पैसे देने वालों को सच का पता ना चल पाता। क्योंकि जरूरी नहीं है कि फेसबुक पर सब पढे लिखे लोग ही हैं। कई ऐसे लोग भी शौकिया यहाँ जुड़े हुए हैं जिन्हें फेसबुक कि ज्यादा जानकारी नहीं है। उनको बस खुशी है और कहने के लिए है कि, वो भी फेसबुक पर है। और इस तरह के मेसेज को अगर कोई परिवार का मामला समझकर उस अकाउंट में पैसे भेज देता तो बेवजह लुट जाता। क्योंकि सामने वाले को तो यही लगेगा कि, उसके जानने वाले को पैसों कि जरूरत है। जरा सोचिए एक छोटी सी बात हमको कितने बड़े अंदेसे की ओर संकेत कर रही है। 

इसी तरह का एक हादसा बहुत साल पहले मेरी एक दोस्त के साथ भी हुआ था। किसी ने उसकि आईडी को हैक कर लिया था। और उसकी आईडी से उसके दोस्तों और बाकी अनजान लोगों को बहुत गलत गलत मेसेजेस कर दिए थे। जब उसको उसके दोस्तों से पता  चला तो उसको बहुत शर्मिंदगी और घर से डांट का सामना करना पड़ा। और अपनी आईडी को बंद करना पड़ा । 

इस तरह के कई ऐसे किस्से हैं  जो हमारे दरमियान होते रहते हैं । कुछ को समय रहते पता चल जाता है। और कुछ लुट पिट जाते हैं। ऐसा नहीं है कि, ये घटना बहुत बड़ी है। मगर अगर गौर किया जाए तो बहुत छोटी भी नहीं है। अगर सावधानी नहीं बरती जाए तो, यही घटनायें हमको बहुत बड़े संकट में डाल सकती है। अब सोचने वाली बात ये है कि, ऊपर जिन सवालों का जिक्र मैंने किया है। जिन्होंने  मुझे या आपको घेरा है। वो कितने सच है? और उसके कारण क्या हैं ? 

1.  सोशल मीडिया सुरक्षित है या नहीं। ये पूरी तरह से हम पर या आप पर निर्भर करता है। फेसबुक हो या तकनीक से जुड़ा कोई और अन्य माध्यम!  सुरक्षित कुछ भी नहीं है। लेकिन पूरी तरह से असुरक्षित भी नहीं है। इन माध्यमों में कई संकेत निर्देशित किये जाते हैं, जिनकी वजह से आप खुद के खाते हो सुरक्षित कर सकते हैं। क्योंकि माध्यम काभी गलत नहीं होता है। ये हम पर निर्भर करता है। कि, हम इसे कितना समय दे रहे हैं और क्यों? जो समय हम इसमें निवेश कर रहे हैं? उसका हमारे हित में कितना सहयोग है। और कितना केवल मनोरंजन के साधन मात्र के लिए।  

2.  सोशल मीडिया पर जितने लोग भी हमसे जुड़ते हैं वो सब हमारे मित्र या हमारे परिजन नहीं होते हैं। ये सत्य है। लेकिन हमारी ज़िंदगी में केवल हमारे अपने लोगों का महत्व ही नहीं होता है। बल्कि कभी कभी किसी मोड़ पर आप ऐसे लोगों से भी मिलते हैं, जो आपके दोस्त या करीबी निकाल जाते हैं। या बन जाते हैं।  जब तक हम किसी नए व्यक्ति या समूह से परिचित नहीं होंगे हम किसी की सोच या उसके विचारों से भी परिचित नहीं हो सकते हैं। और अगर विचारों का आदान प्रदान केवल चंद लोगों में ही सीमित रहा तो बुद्दि और समाज का विकास कैसे संभव हो पाएगा। लेकिन ये भी सच है कि, लोगों कि अछाई बुराई का पता एकदम नहीं चल पाता है। तो ऐसे में आपको हर कदम पर सावधान रहना चाहिए। सोशल मीडिया पर किसी भी अनजान व्यक्ति को अपनी मित्रता सूची में शामिल करने से पहले एक बार खुद से पता करने कि कोशिश करें। और अगर काभी किसी व्यक्ति का आपको पैसों के लिए या इस तरह का कोई भी मेसेज या संदेश आता है। तो बिना सोचे समझे उस पर अपनी प्रतिक्रिया ना दें। क्योंकि आपकि सुरक्षा आपके खुद के हाथों में निहित है। 

 3. जो खाता आपने सोशल मीडिया पर बनाते हैं । पहले उसके सभी नियमों को ध्यान से पढ़ें और उसके बाद ही अपना खाता खोलें। क्योंकि आज साइबर अपराध बहुत तेजी से हमारी ज़िंदगी में घुस गया है। बैंक अकाउंट से लेकर आपका फेसबुक भी आसानी से हैक हो जाता है। तो गोपनीयता कि सारी शर्तों को सोच समझकर निर्धारित करें ।  हर सोशल मीडिया ये पूरी कोशिश करता है कि, आपके खाते कि पूरी सुरक्षा कि जाए । अब ये आपके हाथ में है कि हम उन शर्तों को कैसे अपनाते हैं। ऐसे किसी भी समुदाय से मत जुड़े जिन पर आपको थोड़ा सा भी संदेह हो या, जिन पर कुछ गलत चीजों का प्रचार प्रसार होता है। 

4. आतंक ने पूरी दुनियाँ के दिल-ओ-दिमाग पर कब्जा करके रखा हुआ है। हर व्यक्ति खुद को आतंक के डर से असुरक्षित महसूस करता है। इसमें सोशल मीडिया का दोष नहीं हैं । क्योंकि ये समाज हा सबसे जुड़ा है। और सोशल मीडिया भी इसी समज के व्यक्तियों के द्वारा चलाया जाता है। जब समाज में अछे बुरे सभी लोग हैं। तो यहाँ भी अछे बुरे सब लोग है। चाहे वो किसी भी तरह का अपराध हो, आपको हर जगह मिलेगा । आपके मित्र के वेश में कई लोग यहाँ जुड़े हैं जिनका मकसद सिर्फ और सिर्फ लोगों को गुमराह करना या, दहशत फैलाना है। क्योंकि आतंक एक जगह नहीं हर जगह है। एक रूप में नहीं कई रूपों में है। उसकी कोई समय सीमा नहीं है। वो कभी भी कैसे भी आप तक पहुँच सकता है। तो ये आपको सुनिश्चित करना है कि, आप किन लोगों के संपर्क में यहाँ जुड़ते हैं। 

5. ये सच है कि, सोशल मीडिया का हमारी ज़िंदगी से बहुत गहरा रिश्ता बन गया है। जाने अनजाने हम इससे दूर नहीं रह सकते हैं। ऐसा लगता है कि, हमारी ज़िंदगी की  सारी बागडोर हमने इसके हाथों में दे दी है। लेकिन सोशल मीडिया हमसे ये सब नहीं करवा रहा। या वो नहीं कह रहा। या जिसने इसको बनाया वो नहीं कह रहा कि, हम अपना काम धाम छोड़ कर दिन रात इसी के सामने बैठे रहे । बल्कि हमने खुद इसको अपना आदि बना दिया है। और यही वजह है कि, आज हमारे निजी रिश्तों में वो प्यार, वो वक़्त अब पहले जैसा नहीं रहा। अब कोई किसी से दो घड़ी फुर्सत में बात नहीं कर सकता है। क्योंकि भागदौड़ भरी ये ज़िंदगी आपके रिश्तों को भी भगा रही है। जहां सोशल मीडिया ने एक तरफ हमारे लिए नए मार्गों का निर्माण कराया है। वहीं दूसरी तरफ इसके आदि हो चले लोगों ने अपने रिश्तों को अहमियत देने के बजाय इसको ज्यादा तवज्जो दे दी है। माओं ने अपने बचों की किचकिच से बचने के लिए उनके हाथों में फोन थमाकर खुद को उनसे दूर कर दिया है। सोशल मीडिया हर तरह से हमारी ज़िंदगी का एक विकल्प बन गया है। जो सही नहीं है। 

कहने का आशय है कि, किसी भी माध्यम  को अपनी ज़िंदगी में इतना हक मत दो, कि, वो आपकी ज़िंदगी को कंट्रोल करने लगे। किसी भी चीज को अच्छा बुरा हम खुद बनाते हैं। हमें खुद ते करना है कि, हमारे लिए क्या सही है क्या गलत है। 

सोशल मीडिया केवल एक मंच है, जिस पर आपको अपने हिसाब से अभिनय करना है। लेकिन अभिनय कैसा होगा ये माध्यम तय नहीं करेगा, ये आपको और हमको तय करना है। उसका काम आपको जानकारी देना है। आपको आगे बढ़ाना है। आपको समाज से जोड़ना है। आपको बाज़ार उपलब्ध कराना है। उस बाजार में अछि बुरी सारी चीज़ें मिलती है। तो आपको अच्छा सामान लेना है। ये सबको पता है कि, इस मंच पर आपको सहयोग करने वाले भी हैं और आपको बुरा भला  कहने वाले भी हैं। इसका काम आपका मनोरंजन करना है। लेकिन सोशल मीडिया ये बिल्कुल नहीं कहता है। कि, आप अपने आप को उसको सौंप दो। बच्चे से लेकर बूढ़े आज हर उम्र के लोग यहाँ जुड़े हैं। कुछ लोगों को इसकी अहमियत पता है। कुछ लोग इसके फायदे नुकसान से अनभिज्ञ है। तो मेरा सबसे यही अनुरोध है। कि, इस तरह के फ़र्ज़ी लोगों से सावधान रहें। माध्यमों का सही इस्तेमाल करें। खुद  को हर वक़्त सतर्क रखें। अगर आपका पूरा समय सोशल मीडिया पर भी गुजरता है। तो वो समय आपका काम ही हो। अन्यथा आपका जीवन आपको एक गहरे संकट कि ओर ले जा सकता है। ये बात कहने में बहुत सामान्य लगती है बहुत छोटी लगती है। लेकिन अगर कुछ समय शांति से खुद के साथ केवल खुद के साथ कुछ समय बिता कर देखिए। आपको सारा सत्य ज्ञात हो जाएगा। आपको स्वयं ये एहसास हो जाएगा। कि आपने खुद को इन माध्यमों में कितना उलझ दिया है। कि, बगैर इसके आप अपनी खुशियां भी नहीं बाँट सकते नहीं मना सकते। ऐसा भी नहीं है कि, सबके साथ ऐसा होता है। कुछ लोग इसे केवल और केवल अपनी ज़िंदगी को सफल बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। वो अपना उतना ही समय इन माध्यमों को देते हैं जितना उनके लिए जरूरी होता है। वो केवल इस मंच पर अभिनय करते हैं और फिर अपनी जिम्मेदारियों को निभाने और अपने सपनों को उड़ान भरने में व्यस्त हो जाते हैं। अपने रिश्तों पर इसका बुरा असर नहीं पड़ने देते। लेकिन कुछ लोगों और समुदायों ने इसे अपनी ज़िंदगी बना दिया है। उनके रिश्तों पर इसका असर साफ साफ दिखाई देता है। बच्चों पर इसका गहरा प्रभाव देखने को मिलता है। बच्चे यहाँ बुरी चीज़ें देख बुरी सोच का शिकार हो रहे हैं। अगर ऐसा ही चलत रहा तो समाज के विकास का तो पता नहीं, विनाश जरूर तय है। 

सोचिए! विचार कीजिए ! सवालों के जवाब आपको खुद मिल जाएंगे। 

आपको ये लेख कैसा लगा मुझे जरूर बताइए, और सोशल मीडिया के माध्यमों के विषय में आपके क्या विचार हैं, मुझे कमेन्ट करके जरूर अवगत करायें । हो सकता है आपके विचार किसी को एक नई राह दिखा दे। 

                                                                       समाप्त 

                                
हँसते, मुस्कुराते, स्वस्थ रहिये। ज़िन्दगी यही है।  


आप मुझसे इस आईडी पर संपर्क कर सकते हैं.
sujatadevrari198@gmail.com
© सुजाता देवराड़ी

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