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तुम बेपनाह

Post Views: 39 मुखड़ा 1  तुम बेपनाह बरसी हो बूँद बनकर, फिसलती हुई जिस्म की रूह मैं | आलम है अब ये सोचा कुछ भी ना जाए, तेरी आँखों मैं डूबता जा रहा मैं | क्या ये सच है, ख्वाब है या कोई, बोल दो ना बोल दो ना | 2 तुम बेपनाह बरसी हो बूँद बनकर…… बोल- सुजाता देवराड़ी अंतरा1 ओढ़ लूँ  तुमको में, बनाके गर्म चादर। इस कदर टूट जाऊँ,  बाहों में आकर। सर्द  है ये हवायें, ख़ामोश है ये जहाँ। मेरी ख़्वाहिश है अब ये, ना रहे...

सरहद पर 1

सरहद पर

Post Views: 15 ||सरहद पर||    इस देश के हर नागरिक का सीना, तब चौड़ा हो जाता है। जब शरहद पर हर सैनिक, एक- एक करके जान गवांता है।। आतंक ने दहशत फैलाई, तुम...

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गाँव की यादें

Post Views: 7 गाँव की यादें गाँव की यादें बुलाये मुझे, घर आजा, घर आजा पुकारे मुझे | वो बचपन का खेला, वो मिटटी का ठेला | खेतों मैं जाकर, वो छुपना छिपाना ||...

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बढ़ती जनसंख्या एक गंभीर समस्या

Post Views: 86 “जग में कुछ मुश्किल ना है।  विघ्न है तो हल भी है।। “ दुनियां में इम्पॉसिबल कुछ भी नहीं है, हम अगर मेहनत और लगन से कुछ करने की ठान ले...

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पेन्सिल बॉक्स (लाइफ मैं कुछ चीज़ें कितनी यूनीक होती है )

Post Views: 344 लाइफ मैं कुछ चीज़ें कितनी यूनीक होती है न? और सबसे बड़ी बात की वो चीज़ें हमारी लाइफ मैं एक बहत इम्पोर्टेंट रोल प्ले करती है…. हमें बच्चे से बड़ा बनने...