Category: कविता

आज दिवस मेरी माँ का आया | सुजाता देवराड़ी | हिन्दी कविता 2

आज दिवस मेरी माँ का आया | सुजाता देवराड़ी | हिन्दी कविता

आज दिवस मेरी माँ का आया।आजाद हुए सब, भारत कहलाया।इस धरती की पुण्य भूमि में।धन्य हुए हम, जन्म जो पायाआज दिवस मेरी माँ का आया। कई दुःख सहे, कई पीड़ा झेली।वीर सपूतों ने, फाँसी...

माँ तेरी याद में 3

माँ तेरी याद में

माँ तेरी याद में हर पल ये खुद से कहती हूँ इतना सुन्दर रूप सलोना, मन पावन गंगा तेरा। तेरे होने से ये सारा संसार है माँ,हर आस, भाव, ममता की साँस है माँ...

झूठे दिखावे 0

झूठे दिखावे

तुमने ज़िंदा रहते जाति-धर्म की जो खोखली लंका खड़ी की थी न आज उसी लंका के नीचे अग्नि को साक्षी मानकर सब जाति धर्म तो एक हो गए मगर तुम ना रहे। खुद को...

कद्र (Kadar) 1

कद्र (Kadar)

अगर किसी की कद्र करनी है तो उसके रहते करो । अगर किसी को अच्छा साबित करना है उसके रहते करो। किसी में खूबियाँ ढूँढने के लिए उसका आपसे दूर जाना जरूरी है क्या?...

Gulabi Dhoop 1

गुलाबी धूप | हिन्दी कविता

ठिठुरती ठंड में तेरा गुलाबी धूप सा मुझे छूकर मेरे कानों में धीमें से मुझे पुचकारनाऔर कहना कि मुझे प्यार की बेल सा तुमसे लिपटना है। सिमटती रात में तेरे दहकते लबों का मुझे...

बस हम हो वहाँ | हिन्दी कविता | विकास नैनवाल 'अंजान' 1

बस हम हो वहाँ : विकास नैनवाल ‘अंजान’

एक मैं हूँएक तुम होऔर बस हम हों वहाँ न हो दिन की खबरन हो वक्त का पताबस एक दूसरे में डूबे हुए हमकुछ ऐसे हो जायेंजैसे हो जाती हैं दो नदियाँऔर बन जाता...

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पंदेरा धार पंदेरा

पंदेरा धार पंदेराबहता जाए जल धार पंदेरातू चंचल, शांत, गुस्सेल कभीतू ही प्यास बुझाए धार पंदेराहे धार कहाँ उद्गम कहाँ अंत तेरादिखता कण कण में अंश तेराधरती की गोद में इठलाती हैपर्वत झरना झील...

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क्या है ज़िंदगी

किसी के लिए ज़िंदगी दो दिन का मेला है। किसी के लिए ज़िंदगी चार दिन की चाँदनी । किसी के लिए ये ज़िंदगी चंद लम्हों की की खुशी है। लेकिन सच तोआखिर ये है...