Category: कविता

Gulabi Dhoop 1

गुलाबी धूप | हिन्दी कविता

ठिठुरती ठंड में तेरा गुलाबी धूप सा मुझे छूकर मेरे कानों में धीमें से मुझे पुचकारनाऔर कहना कि मुझे प्यार की बेल सा तुमसे लिपटना है। सिमटती रात में तेरे दहकते लबों का मुझे...

बस हम हो वहाँ | हिन्दी कविता | विकास नैनवाल 'अंजान' 1

बस हम हो वहाँ : विकास नैनवाल ‘अंजान’

एक मैं हूँएक तुम होऔर बस हम हों वहाँ न हो दिन की खबरन हो वक्त का पताबस एक दूसरे में डूबे हुए हमकुछ ऐसे हो जायेंजैसे हो जाती हैं दो नदियाँऔर बन जाता...

0

पंदेरा धार पंदेरा

पंदेरा धार पंदेराबहता जाए जल धार पंदेरातू चंचल, शांत, गुस्सेल कभीतू ही प्यास बुझाए धार पंदेराहे धार कहाँ उद्गम कहाँ अंत तेरादिखता कण कण में अंश तेराधरती की गोद में इठलाती हैपर्वत झरना झील...

0

क्या है ज़िंदगी

किसी के लिए ज़िंदगी दो दिन का मेला है। किसी के लिए ज़िंदगी चार दिन की चाँदनी । किसी के लिए ये ज़िंदगी चंद लम्हों की की खुशी है। लेकिन सच तोआखिर ये है...

बूँदें तो आख़िर बूँदें होती है. 5

बूँदें तो आख़िर बूँदें होती है.

बूँदें तो आख़िर बूँदें होती है.   क्या अजीब खेल है इन बूंदों का, कुछ कभी बारिश बनकर, ज़मीं को हरा -भरा कर देती है । तो कभी आंसू बनकर आँखों को, सूखे बंज़र...

क्या हो गया इस देश को 0

क्या हो गया है इस देश को

मेरी आँखों से बहता पानी है, क्या हो गया है इस देश को।कोई वहशीपन में कोई है नशे की धुन में, क्या हो गया है इस देश को। लड़ना चाहूँ, मरना चाहूँ, करना चाहूँ...

www.tumblr.com 0

अच्छा लगता है।

मुझे मंजूर है हर वो मुसीबतें, जो बे-वक़्त बिन बताए चली आती है,क्योंकि मुझे ज़िंदगी के लिए लड़ना अच्छा लगता है।मुझे मंजूर है हर वो आँसू, जो बिन बादल बरसात सी मुझे भिगोती है,क्योंकि...

0

अनजाना रिश्ता

एक अनजाने रिश्ते की ख़ुशी और डर दोनों पनपने लगे हैं।सवाल -जवाब की उलझनें आपस में ख़ुद से ही झगड़ने लगें हैं।।जाने क्या मोड़ लेंगी राहें, ना उसको पता है ना कोई ख़बर मुझे।सही...