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तकनीकी & सोशल मीडिया से जुड़े कई पहलू (Digital Marketing, Social Media)

Post Views: 105 क्या तकनीकी का उपयोग पूरी तरह से हमारे हित में है ? आज हम लोग तकनीकी के उस दौर में हैं जहां हर चीज कंप्यूटर से जुड़ी हुई है । इसके...

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अनजाना सा एक चेहरा

Post Views: 96 “पहली दफ़ा कुछ ऐसा हुआ, दिल ने एक चुगली दिमाग़ से की।उस गली में कोई ख़ास नूर तो नहीं था, उस शीशे में खड़ी कोई हूर तो थी।।”   बस यही...

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वनाग्नि | साँसे तो साँसे होती है, चाहे इंसान की हो या फिर मासूम जानवरों की

Post Views: 508 उत्तराखंड में वनाग्नि चीरते हुए अंधकार को जब एक दिए की लौ रौशन करती है तो बेहद ख़ूबसूरत लगती है। हवन की  चिंगारी जब हवा में उड़ती हैं तो भी संतोषजनक...

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खलंगा मेला – 24 नवम्बर 2019

Post Views: 120 आदिकाल से ही इनसान घुमक्क्ड प्रवृति का रहा है। घुमक्क्ड़ी हमे विरासत में मिली है। आज भी शायद ही कोई हो जिसे घूमना पसंद ना हो। आज के दौर में तो...

शोध(Research) 0

शोध(Research)

Post Views: 33 शोध क्यों जरुरी है? Image by Free-Photos from Pixabay आजकल हर कोई किसी न किसी विषय पर शोध करता ही रहता है। लेकिन कभी-कभी बिना सोचे समझे, बिना जाने पहचाने शोध...

ये दिल तुम बिन 1

ये दिल तुम बिन

Post Views: 38   ये दिल तुम बिन ये दिल तुम बिन कुछ कहता नहीं, कुछ सुनता नहीं कहीं रुकता नहीं। ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं, कुछ सुनता नहीं कहीं रुकता नहीं।। साँसे...

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तुम बेपनाह

Post Views: 39 मुखड़ा 1  तुम बेपनाह बरसी हो बूँद बनकर, फिसलती हुई जिस्म की रूह मैं | आलम है अब ये सोचा कुछ भी ना जाए, तेरी आँखों मैं डूबता जा रहा मैं | क्या ये सच है, ख्वाब है या कोई, बोल दो ना बोल दो ना | 2 तुम बेपनाह बरसी हो बूँद बनकर…… बोल- सुजाता देवराड़ी अंतरा1 ओढ़ लूँ  तुमको में, बनाके गर्म चादर। इस कदर टूट जाऊँ,  बाहों में आकर। सर्द  है ये हवायें, ख़ामोश है ये जहाँ। मेरी ख़्वाहिश है अब ये, ना रहे...