Category: तुझे कागज पर उतारा मैंने

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अनजाना रिश्ता

एक अनजाने रिश्ते की ख़ुशी और डर दोनों पनपने लगे हैं।सवाल -जवाब की उलझनें आपस में ख़ुद से ही झगड़ने लगें हैं।।जाने क्या मोड़ लेंगी राहें, ना उसको पता है ना कोई ख़बर मुझे।सही...

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खैर छोड़ो ये सब

सुनो! कभी -कभी  सोचता हूँ कुछ समय में  तुम किसी और की हो जाओगी, तो सब कैसे पलट जाएगा न । बेदर्द वक़्त ने हमें दूर करने का फरमान जो जारी कर दिया था।...

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जलन- आप जल तो लोगे

हम लोग अपनी ज़िंदगी में कितने स्वार्थी क़िस्म  के हो गए हैं ना..? ये मेरा वो मेरा, इसका-उसका,  ये “मैं” नामक अहंकार हमको दिन ब दिन जकड़ते जा रहा रहा है। मुझे इतना चाहिए, मुझे...

दिल की आरज़ू 0

दिल की आरज़ू

तेरा मन चंचल है मैं जानता हूँ। पर तू मेरी जात से वाकिफ़ न ही हो तो बेहतर है।। हँसते, मुस्कुराते, स्वस्थ रहिये। ज़िन्दगी यही है।    आप मुझसे इस आईडी पर संपर्क कर...

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इज़हार-ए-मोहब्बत

इन गालों पे मेरे,तेरी हथेली के छाप छपे हैं।  इज़हार-ए-मोहब्बत, जब से तेरा दीदार किये हैं।  सबकी नज़रों से तुझे बचाने के, तमाम जतन कर लिए।  पर पलकें मेरी ही चोरी से, तेरी उँगलियाँ...

ये दिल तुम बिन 1

ये दिल तुम बिन

  ये दिल तुम बिन ये दिल तुम बिन कुछ कहता नहीं, कुछ सुनता नहीं कहीं रुकता नहीं। ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं, कुछ सुनता नहीं कहीं रुकता नहीं।। साँसे चलती हर रोज...

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तुम बेपनाह

मुखड़ा 1  तुम बेपनाह बरसी हो बूँद बनकर, फिसलती हुई जिस्म की रूह मैं | आलम है अब ये सोचा कुछ भी ना जाए, तेरी आँखों मैं डूबता जा रहा मैं | क्या ये सच है, ख्वाब है या कोई, बोल दो ना बोल दो ना | 2 तुम बेपनाह बरसी हो बूँद बनकर…… बोल- सुजाता देवराड़ी अंतरा1 ओढ़ लूँ  तुमको में, बनाके गर्म चादर। इस कदर टूट जाऊँ,  बाहों में आकर। सर्द  है ये हवायें, ख़ामोश है ये जहाँ। मेरी ख़्वाहिश है अब ये, ना रहे कोई दरमियाँ। एहसास...